ख़बरें

हरियाणा में पंचायती जमीन पर बेठे लोगों को मिलने लगे अपने घर; ये रहेगी प्रोसेस

×

हरियाणा में पंचायती जमीन पर बेठे लोगों को मिलने लगे अपने घर; ये रहेगी प्रोसेस

Share this article

नई दिल्ली, 14 जून: हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड एवं निगमों तथा शहरी निकायों की जमीन पर बनी दुकानों व मकानों पर पिछले 20 सालों से काबिज लोगों को मालिकाना हक मिलने में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल नाराज हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव संजीव कौशल ने विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों की बैठक बुलाकर स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में हो रही देरी की समीक्षा की। पता चला कि अभी कई विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने लोगों को मालिकाना हक प्रदान करने के लिए अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी भी नियुक्त नहीं किए।

15 दिन में संपत्ति पर मिलेगा मालिकाना हक

नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश में सरकारी जमीन पर 20 साल पहले बनाए गए मकान-दुकानों पर काबिज लोगों को 15 दिन में संपत्ति पर मालिकाना हक मिलेगा। सरकार द्वारा बनाई गई नई पालिसी के तहत अभी तक एक हजार लोगों ने ऐसी संपत्ति पर मालिकाना हक मांगा है। इनमें से सिर्फ 99 लोगों को ही सरकारी जमीन पर बने मकान-दुकानों का मालिकाना हक मिला है, जबकि 901 लोगों के आवेदन पर अधिकारियों के स्तर पर निर्णय लंबित है, जिन पर अगले एक पखवाड़े में फैसला लेना होगा।

शहरी निकाय विभाग में नामित नहीं नोडल अधिकारी

मुख्य सचिव संजीव कौशल को जानकारी दी गई कि हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्टेट नोडल अधिकारी नामित किए जा चुके हैं। मुख्य सचिव ने सबसे अधिक चिंता इस बात पर जताई कि विशेष रूप से जिस शहरी निकाय विभाग की यह योजना है, उसी ने अभी तक नोडल अधिकारी नामित नहीं किए। संजीव कौशल ने निर्देश दिए कि बाकी बचे सभी विभागों के निदेशक या महानिदेशक स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के लिए स्वयं स्टेट नोडल अधिकारी होंगे, क्योंकि उन्होंने निर्णय लेने में देरी की है।

मालिकाना हक को लेकर सीएम ने जताई नाराजगी

मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत सरकारी विभागों की जमीन पर 20 साल से काबिज लोगों को विभागीय प्रक्रिया अपनाते हुए मालिकाना हक प्रदान करने का निर्णय लिया था, लेकिन इसका सही ढंग से अनुपालन नहीं हो रहा है, जो कि चिंता का विषय है। इससे मुख्यमंत्री नाराज हैं। कौशल ने जिन विभागों के लिए स्टेट नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा चुके हैं, उनके द्वारा भी मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए आने वाले आवेदनों पर त्वरित निर्णय नहीं लिए जाने पर चिंता जाहिर की।

बैठक में बताया गया कि अब तक सिर्फ 99 आवेदनों के संबंध में ही लोगों को मालिकाना हक देने की अनुमति दी गई है, जबकि 901 आवेदनों पर निर्णय लंबित है। मुख्य सचिव ने कहा कि यह स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि हर विभाग को लंबित आवेदनों पर 15 दिन में फैसला लेना होगा और यदि इस अवधि में निर्णय नहीं लिया जाता तो जिस सरकारी विभाग की भूमि है, उसके जिला स्तर के अधिकारी का फैसला मान्य होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक प्रदान करने के आवेदनों पर तत्परता से कार्य किया जाए।

बैठक कर मुख्य सचिव कार्यालय को भेजेंगे अपनी रिपोर्ट

मुख्य सचिव ने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव इस संबंध में सभी संबंधित विभागों से नियमित तौर बैठक करेंगे और मुख्य सचिव कार्यालय को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। इसके अलावा, वो रद्द किए गए सभी मामलों का अध्ययन भी करेंगे और सूचित करेंगे कि निरस्तीकरण उचित था या नहीं। इसका उन्हें अपनी रिपोर्ट में कारण स्पष्ट करना होगा। बैठक में कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव विकास गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

क्या है मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना

दरअसल, सरकारी जमीन पर बने मकान-दुकान के विवादों को निपटाने के लिए एक जुलाई 2021 को यह योजना शुरू की गई थी। इसके तहत 20 वर्ष या इससे अधिक वर्षों से काबिज लोगों को मालिकाना हक दिया जाएगा। काबिज व्यक्ति को मालिकाना हक लेने के लिए कलेक्टर रेट से भी कम अदायगी करनी होगी।

मालिकाना हक के लिए कलेक्टर रेट पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक छूट देने का प्रविधान किया गया है। आवेदक अलॉटी या सब अलॉटी नहीं है, लेकिन पॉलिसी की सभी योग्यताएं पूरी करता है तो उसे 30 हजार रुपये का एकमुश्त नियमित शुल्क भी भरना होगा।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now